March 5, 2021
HSN full form in Hindi और इसके टैक्स की जानकारी।

HSN code full form in Hindi – HSN के काम और देरी से देने के शुल्क

केंद्र सरकार ने कर प्रणाली को आसान बनाने और ‘एक देश, एक कर’ की अवधारणा के तहत एक जुलाई, 2017 को देश भर में गुड्स एंड सर्विस टैक्स यानी जीएसटी लागू कर दिया। इसके तहत पांच स्लैब तय किए गए शून्य से लेकर 28 प्रतिशत तक के पांच स्लैब तय किए गए।

आवश्यक वस्तुओं को कर के दायरे से बाहर रखा गया।

कई चीजों पर टैक्स बढ़ाया गया तो कई पर घटाया गया। पेट्रोलियम पदार्थों को इसके दायरे से बाहर रखा गया। इसकी जिम्मेदारी अभी भी राज्य सरकारों पर है, जबकि पेट्रोलियम से जुड़े व्यवसायी इसे भी जीएसटी के तहत लाए जाने की मांग कर रहे हैं।

साल भर में जीएसटी को लेकर कई तरह की दिक्कतें आईं, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार ने नियमित अंतरालों पर जीएसटी कौंसिल की बैठकों का प्रावधान किया है, जिसमें सभी प्रदेशों के संबंधित मंत्री और अधिकारी अपने राज्यों की दिक्कतें रख उनका समाधान पाते हैं। अलबत्ता तमाम विरोध की वजह से जम्मू-कश्मीर में यह जीएसटी एक सप्ताह बाद यानी 8 जुलाई को लागू किया जा सका।

जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं के वर्गीकरण का अंतर्राष्ट्रीय तरीका HSN अपनाया गया है। आज हम आपको इससे जुड़ी तमाम जानकारियां मुहैया कराएंगे- जैसे की HSN code full form in Hindi और HSN के फायदे.

HSN code Full form in Hindi – (एचएसएन)

HSN full form in Hindi और इसके टैक्स की जानकारी।
HSN full form in Hindi

HSN code का फुल फॉर्म – Harmonized System of Nomenclature

यह वस्तुओं और सेवाओं के वर्गीकरण का एक अंतराष्ट्रीय तरीका हैं।

HSN in Hindi – हार्मोनाइज़्ड सिस्टम आफ नामेन्‍क्लेचर.

एच.एस.एन.कोड को व्यवस्था के अंर्तगत वस्तुओं को वर्गीकृत करने के लिए प्रयोग किया जाता हैं। बिल में HSN कोड लिखने को टर्न ओवर के आधार पर आवश्यक किया गया है।

क्यों ज़रूरी है HSN?

ऐसे कारोबारी/करदाता, निकी कुल बिक्री/टर्नओवर डेढ़ करोड रुपये से अधिक है, लेकिन पांच करोड़ रुपये से कम है, उन्हें 2 अंकों के एचएसएन कोड का उपयोग करना हैं| जिन कारोबारियों की कुल बिक्री/टर्नओवर पांच करोड़ या उससे अधिक है तो वह 4 अंकों के एचएसएन कोड का उपयोग करेंगे।

डेढ़ करोड रुपये से कम है, उन्हें अपने चालान/बिलों पर एचएसएन कोड का उल्लेख करना आवश्यक नहीं है।

SIP full form in Hindi

HSN देरी का शुल्क

नियम के अनुसार अगर कोई व्यक्ति समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करता है तो जीएसटी कानून के तहत उस पर विलंब शुल्क लगाने का प्रावधान है। जीएसटी रिटर्न दाखिल करने और टैक्स का भुगतान न करने पर केंद्रीय जीएसटी और एसजीएसटी के लिए सौ-सौ रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पेनाल्टी देनी पड़ती है।

व्यापारियों, कारोबारियों की मांग पर सरकार कई बार विलंब शुल्क माफ चुकी है। सितंबर माह में खत्म हुई तिमाही के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। इससे पहले सरकार ने जुलाई के लिए जीएसटी रिटर्न जमा करने में हुई देरी के चलते व्यापारियों पर लगा विलंब शुल्क माफ कर दिया था। कारोबारियों की फिर से यही मांग थी कि सरकार को जीएसटीआर-3बी दाखिल करने में हुई देरी के चलते उन पर लगा विलंब शुल्क माफ करे। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर कोई व्यापारी विलम्ब शुल्क जमा कर चुके हैं तो यह शुल्क जल्द ही उनके खातों में रिफंड कर दिया जाएगा।

दरअसल, व्यापारी कभी फार्म प्रपत्रों की अधिकता, मासिक रिटर्न तो कभी इंटरनेट न चलने की वजह से जीएसटी वक्त पर भरने से महरूम रह जाते हैं। खास तौर पर कश्मीर घाटी में इस तरह की दिक्कतें व्यापारी सबसे ज्यादा भुगत रहे हैं।

HSN पोस्ट पर हमारी राय

यह हमने HSN के काम, फायदे और HSN full form in Hindi में बताई है. हमे comment में बताए की आपको हमारी पोस्ट कैसी लगी? कोई सवाल हो तो ज़रूर पूछे.

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