March 5, 2021

CTC full form in Hindi – CTC और salary में क्या फर्क है?

अगर आप केवल अच्छी सीटीसी से प्रभावित होकर किसी कंपनी में ज्वाइन करने जा रहे हैं तो जरा ठहर जाएं। एक नजर में जरा सीटीसी को पूरी तरह समझ लें। दरअसल, एक कंपनी अपने कर्मचारियों पर कई तरीके से खर्च करती है। इसमें मौद्रिक के साथ ही कई अमौद्रिक फायदे जुड़े हैं।

मसलन महीने के वेतन के अलावा ट्रेनिंग पर आने वाला खर्च, आवासीय सुविधा, मोबाइल फोन खर्च, मेडिकल अलाउंस और अन्य खर्च। तो अगर आप नौकरी करने जा ही रहे हैं तो जान लें कि आपका सीटीसी कितना है, CTC full form in Hindi और CTC और salary में फर्क जानेगे।

Mnc full form in Hindi और इन कम्पनीज के काम करने का तरीका।

CTC Full form

CTC यानी वह लागत जो कंपनी पर आपकी नियुक्ति से वहन करती है। अमूमन मासिक वेतन तथा अन्य लाभ जो कर्मचारी को दिये जाते हैं, उसके जोड़ से ही सीटीसी बनता है।

जैसा की आपने देखा की इसका full form होता है cost to company जिसे हम आम बोलचाल की भाषा में कंपनी द्वारा कर्मचारी पर किये जाने वाले पूरे खर्च की लागत कहते है | CTC किसी employee के कुल वेतन पैकेज का एक शब्द है, इसे भारत एवं दक्षिण अफ्रीका के देशों में इस्तेमाल किया जाता है|

यह एक संगठन के द्वारा खर्चों की कुल राशि को एक वर्ष के दौरान खर्च किया जाता है | यह कर्मचारी के सेवा अवधि के दौरान किसी कर्मचारी को प्राप्त किए गए सभी अतिरिक्त लाभों की लागत के लिए वेतन जोड़कर गणना की जाती है|

अगर किसी कर्मचारी का वेतन Rs 50,000 है और कंपनी कर्मचारी के स्वास्थ्य बीमा के लिए Rs 5,000 का भुगतान करती है, तो employee का CTC Rs 55,000 है जो कर्मचारी के द्वारा सीधे राशि प्राप्त नहीं किया जा सकता|

CTC और सैलरी में फर्क क्या है?

यह हैं सीटीसी के हिस्से-

मूल वेतन यानी बेसिक सेलरी – कंपनी कर्मचारी को मूल वेतन देती है, जिस पर इन्कम टैक्स की छूट नहीं होती।

महंगाई भत्ता या डीए – यह कर्मचारी का जीवनस्तर सुधारने के लिए होता है, जिस पर इन्कम टैक्स कटता है।

  • किराया भत्ता यानी एचआरए – कई कंपनियां कर्मचारी को महानगर में रहने की स्थिति में मूल वेतन और महगाई भत्ते की जोड़ का 50 प्रतिशत भाग तथा अन्य शहरों में रहते हैं, तो इसक 40 प्रतिशत मकान किराया भत्ते के रुप देती है।
  • कन्वेंयंस अलाउंस – यह भत्ता कर्मचारी को काम पर आने-जाने के लिए दिया जाता है। इस पर आकर: यह भत्ता आने जाने के लिए दिया जाता है।
    सस्ती दर पर खाना – अगर कंपनी सस्ती दरों पर खाने के सामान खरीदने के कूपन मुहैया कराती है या उसकी कैंटीन में सस्ती दर पर खाना उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसका भार कंपनी खुद उठा रही है, तो यह भी सीटीसी का एक भाग है। अगर इसके लिए नकद राशि का भुगतान नहीं हो रहा है तो इस पर इन्कम टैक्स नहीं कटता है।
  • मोबाइल या टेलीफोन बिल – कई कंपनियां कर्मचारियों के मोबाइल/टेलीफोन बिलों की एक निश्चित राशि का क्लेम करने पर पुर्नभुगतान (रिइंबर्समेंट) करती है। इस भुगतान पर इन्कम टैक्स की छूट नही होती है।

    यह भी है सीटीसी का हिस्सा –

    • भविष्य निधि यानी पीएफ – कर्मचारी के वेतन से भविष्य निधि फंड के लिए 12 प्रतिशत राशि प्रतिमाह कटती है, जिसका बराबर भाग नियोक्ता मिलाता है। नियोक्ता द्वारा जोड़ी गयी यह राशि सेवानिवृति या त्यागपत्र देने पर ही मिलती है। नियोक्ता द्वारा दिये गये अंशदान की राशि और इस पर आने वाले खर्च को
    • ग्रेच्युटी – नियोक्ता इंश्योरेंस कम्पनियों के साथ मिल कर इस फंड की व्यवस्था करता है। ग्रेच्युटी के लिए रखे गये फंड़ के वार्षिक भाग को सीटीसी में जोड़ा जाता है, जिसे कभी-कभी सीटीसी में दिखाया जाता है।
    • एलटीसी – इसके तहत कंपनियां कर्मचारियों को अवकाश ले कर यात्रा करने की सुविधा मुहैया कराती हैं।
    • मेडिकल अलाउंस – कई कंपनियां अपने कर्मचारियों तथा उनके परिवार के सदस्यों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराती है। इस सुविधा पर जो खर्च आता है, उसे सीटीसी में जोड़ा जाता है
    • पेंशन और इंश्योरेन्स किस्त में सहयोग – कर्मचारी के स्वास्‍थ्य बीमे के प्रीमियम तथा पेंशन स्कीम के लिए दी जाने वाली राशि का भुगतान अगर कंपनी करती है, उसे सीटीसी में जोड़ा जाता है।
      इस पोस्ट पर आपकी राय-

      यह हमने CTC और सैलरी में फर्क जाना, CTC को समझा और CTC full form इन Hindi में भी जानी. कोई सवाल हो तो comment में ज़रूर पूछे, धन्यवाद I

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