September 23, 2021

Atal Bihari Vajpayee Life Story In Hindi- अटल विहारी बाजपेयी की जीवनी

“मेरे सपनों का भारत: भूख और डर से दूर का भारत, ग़रीबी और निरक्षरता से दूर का भारत। मैं एक ऐसे भारत की कल्पना करता हूँ जो कि सम्पन्न हो, मज़बूत हो और सम्पूर्ण दुनिया में आदर्श राष्ट्र के रूप में जाना जाए। एक देश जो कि दुनिया के सभी राष्ट्रों के बीच सम्मान की दृष्टि से देखा जाए।”                                                                                                                                                                                                        – अटल बिहारी वाजपेयी

आजाद भारत के इतिहास में ना तो आज तक कोई भी अटल विहारी जी जैसा दूरदर्शी, निर्भीक तथा देश को सर्वोपरि रखने वाला नेता हुआ है और ना ही शायद भारत के इतिहास में अब कोई भी नेता उनकी बराबरी कर सकेगा। वो एक ऐसे राजनेता थे जिनके समर्थन में विपक्षी पार्टियां भी कड़ी रहती थी I वो एक ऐसे राजनेता थे जिन्हे सत्ता से बहार रहते हुए भी भारत के प्रधानमंत्री द्वारा विदेश में भारत के प्रतिनिधित्व के लिए भेजा जाता था I कुछ ऐसे ही थे अटल जी, जो की अमेरिका जैसे शक्तिशाली देश को भी नज़रअंदाज कर के भारत को मजबूत बनाने के लिए परमाणु परीक्षण करने की हिम्मत रखते थे I जो पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना जानते थे और जो लोकतंत्र का इतना सम्मान करते थे की भरे संसद में कहते थे “पार्टियां बनेगी बिगड़ेंगी, सरकार आएंगी- जाएँगी, सत्ता का खेल चलता रहेगा, लेकिन हम रहे न रहे ये देश रहना चाहिए, ये लोकतंत्र रहना चाहिए I ”

इसी क्रम में चलिए आज आपको हम अटल जी के अटल जीवन के सफर पर ले चलते हैं-

अटल बिहारी वाजपेयी जी निश्चित तौर पर भारत के सबसे यशस्वी प्रधानमंत्री के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन इससे पहले भारतीय जनसंघ को रूप देने और भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति में स्थान दिलाने के लिए उनके संघर्ष को भी नहीं भुलाया जा सकता है। अटल बिहारी वाजपेयी भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में जाने जाते हैं जो कि संयुक्त राष्ट्र संघ के भाषण में भी राष्ट्र भाषा हिंदी का उपयोग करते थे। सम्पूर्ण विश्व मे भारत को सम्मान का दर्ज़ा दिलाने वाले अटल जी ने अपने कार्यों से सभी को सुशासन और जनतंत्र का सही अर्थ समझा दिया था।

कभी विवाह नहीं किया मगर एक बेटी को पाला है-

अटल बिहारी जी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्यप्रदेश के ग्वालियर शहर में हुआ था। उनके पिता श्री कृष्ण विहारी बाजपेयी अपने गाँव के स्कूल में शिक्षक हुआ करते थे। अटल जी की माता का नाम कृष्णा देवी था।  वाजपेयी जी ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के सरस्वती शिशु मंदिर से अर्जित की थी। लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उनका प्रवेश उज्जैन के एंग्लो वर्नाक्यूलर मिडिल स्कूल में करा दिया गया। इसी स्कूल में उनके पिता हेडमास्टर भी थे।
अटल जी ने कभी विवाह नहीं किया था लेकिन उन्होंने अपनी मित्र राजकुमारी कौल और बीएन कौल की बेटी नमिता भट्टाचार्या को गोंद लिया हुआ था। अटल जी ने नमिता को अपनी बेटी की तरह पाला था। अटल जी अपनी मृत्यु तक इसी गोद लिए हुए परिवार के साथ ही रहते थे।

जब नेहरू जी ने अटल विहारी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी की- 

अटल बिहारी वाजपेयी जी ने अपना राजनीतिक  ग्वालियर में आर्य कुमार सभा के साथ शुरू किया था। साल 1944 में ही वो आर्य सभा के मुख्य सचिव बना दिए गए। मात्र 16 साल की उम्र में ही अटल जी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के काफ़ी सक्रिय कार्यकर्ता बन चुके थे। अगस्त 1942 में हुए भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग लेने की वज़ह से अटल जी के साथ ही उनके बड़े भाई प्रेम वाजपेयी को 24 दिनों के लिए जेल भी जाना पड़ा था। इसके बाद साल 1951 में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के साथ अटल बिहारी जी को नई गठित पार्टी भारतीय जनसंघ को चलाने का दायित्य सौंपा गया। ये पार्टी आरएसएस से ही जुड़ी हुई थी जो कि हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए कार्य करती थी। हस वक़्त अटल जी को इस पार्टी के उत्तरी क्षेत्र का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। साल 1957 के चुनाव में अटल जी ने बलरामपुर से चुनाव जीता।उनकी इस जीत ने सभी का ध्यान उनकी तऱफ आकर्षित किया। इस वज़ह से ही उन्हें साल 1968 में जन संघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। साल 1977 में भारतीय जन संघ तीन और पार्टियों के साथ मिलकर जनता पार्टी के रूप में उभर कर सामने आई।

विदेश मंत्री रहते हुए अटल जी ने भारत का रिश्ता पाकिस्तान और चीन के साथ मज़बूत करने में काफ़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी कूटनीति और राजनीतिक सूझ बूझ को देखते हुए उस वक़्त के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने अटल जी के प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। साल 1980 में अटल जी ने कुछ मतभेद के चलते जनता पार्टी छोड़कर फ़िर बीजेएस में शामिल हो गए। बाद में इस पार्टी का नाम भारतीय जनता पार्टी हो गया। साल 1992 में अटल जी उन कुछेक हिन्दू नेताओं के रूप में खड़े हुए जो कि अयोद्धा में ऐतिहासिक मस्जिद के गिराए जाने के विरोध में थे।

13  दिन के प्रधानमंत्री- 

साल 1996 में अटल जी ने पहली बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, लेकिन वो मात्र 13 दिनों तक ही इस पद पर बने रह सके। लेकिन साल 1998 में बीजेपी की बहुमत से जीत हुई और फिर अटल जी ने दोबारा भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। एक प्रधानमंत्री के रूप में अटल जी किसी भी ऐसे फ़ैसले को स्वीकार नहीं करते थे जिससे कि देश की सुरक्षा पर कोई आँच आये। साल 1998 में उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों के विरोध के बावजूद बहुत से न्यूक्लियर बमो का परीक्षण कराने का साहस दिखाकर ख़ुद की कार्यशैली का परिचय दे दिया था।

साल 2003 में वाजपेयी जी ने कश्मीर मुद्दे को भी सुलझाने की दिशा में बहुत से महत्वपूर्ण क़दम उठाये थे। अटल जी के नेतृत्व में भारत ने ना सिर्फ़ सुरक्षा के क्षेत्र में अपने हाथ मज़बूत किये बल्कि आर्थिक रूप से भी शसक्त राष्ट्र के रूप में उभरा। साल 2004 के लोकसभा चुनावों में उनकी पार्टी को हार नसीब हुई और फ़िर उन्होंने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इसके बाद साल 2005 में अटल जी ने राजनीति से सन्यास ले लिया।

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भारत रत्न “अटल विहारी “-

साल 1992 में, अटल जी को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इसके बाद साल 1994 में उन्हें लोकमान्य तिलक अवॉर्ड दिया गया। साल 2015 में उन्हें ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया। अक्टूबर 2018 में, गंगोत्री के निकट 4 हिमालय की चोटियो का नाम भी उनके नाम पर रखा गया। नवम्बर 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके सम्मान में लखनऊ में बने इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम का नाम बदलकर ‘भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी क्रिकेट स्टेडियम’ रख दिया।

अन्तिम समय:

11 जून 2018 को अटल जी को बेहद अस्वस्थ हालत में दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया। यहाँ वो 9 हफ़्तों तक एम्स के डॉक्टर की देखरेख में रहे। इसके बाद 16 अगस्त 2018 को भारत माता का ये सच्चा सपूत करोड़ो देशवासियों की आँखों को गीला करके सदा के लिए परलोक चला गया।  उनकी मृत्यु के बाद केंद्र सरकार द्वारा 7 दिनों का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया।  इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका हुआ रखा गया।  भले ही अटल जी आज हमारे बीच नहीं रहे लेकिन जैसे-जैसे भारत तरक़्क़ी की बुलंदियों को छूता जाएगा, उनका योगदान हमारे जेहन में आता रहेगा।

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